Chand Shayari In Hindi

190+ New Chand Shayari In Hindi Heart Touching  – 2026

क्या आपने कभी चाँद को देखकर उसकी चमक से एक अनकहा सा जुड़ाव महसूस किया है? Chand Shayari in hindi,और  चाँद पर लिखी गई शायरी) उस अनोखे जुड़ाव को व्यक्त करती है, जो इंसान और चाँद के बीच महसूस होता है। 

अंत में, आप न केवल इस कला रूप की सराहना करना सीखेंगे, बल्कि यह भी जान पाएंगे कि इसे अपने प्रेम के अभिव्यक्तियों में कैसे शामिल किया जा सकता है।

हर चाँद की रात जब सन्नाटा छा जाता है, तब शायर अपने दिल की बातों को कागज पर उतारता है। “इस चाँद के साए में तेरी यादों की छांव,” जैसे बोल हम सभी के भीतर गहरी भावनाओं को जगाते हैं। शायरी में चाँद का प्रतीकात्मक उपयोग हमें यह सिखाता है कि प्रेम, जैसे चाँद की रोशनी, कभी न खत्म होने वाला सफर है।

Chand shayari in love
Chand shayari in love

चाँद के दीदार में तुम छत पर क्या चली आई,
शहर में ईद की तारीख मुक्कमल हो गयी….

इश्क तेरी इन्तेहाँ इश्क मेरी इन्तेहाँ,
तू भी अभी न-तमाम मैं भी अभी न-तमाम।

एक तेरा नाम रहे मेरी जुबान पे
जैसे चांद रहता है उस आसमान पे।

तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है !

सारी रात गुजारी हमने इसी इंतजार में की,
अब तो चाँद निकलेगा आधी रात में..

रहने दो अभी चाँद सा चेहरा मिरे आगे
मय और पिलाओ कि अभी रात बहुत है….

चाँद होता न आसमाँ पे अगर
हम किसे आप सा हसीं कहते….

एक चांद कहकर गया मुझसे आज निकलेगा ज़रूर
एक निगाह लिए बैठा हूं आज सुबह से मै !!

चांद नजर आया खुशियों की सौगात लाया
आपको और अपनों को ईद का ये पर्व मुबारक लाया !!

खूबसूरत गज़ल जैसा है तेरा चाँद सा चेहरा
निगाहे शेर पढ़ती हैं तो लब इरशाद करते है।

आज फिर चाँद देर से निकला
तुम ने फिर देर कर दी आने में.

चाँद में नज़र कैसे आए तेरी सूरत मुझको,
आँधियों से आसमाँ का रंग मैला हो गया..!!

न चाहकर भी मेरे लब पर ये फरियाद आ जाती है,
ऐ चाँद सामने न आ, किसी की याद आ जाती है।

जिक्र तेरी खूबसूरती का जो किया तो वो चांद भी शरमाया,
हम किस्से पर किस्सा सुनाते गए वो बादलों में गुम होता गया।

वो पानी में जब अपनी छब देखता है तो मैं भी,
नदी चाँदनी में नहाते हुए देखता हूँ। 

तुझको देखा तो फिर उसको ना देखा मैंने
चाँद कहता रह गया मैं चाँद हूँ मैं चाँद हूँ 

क्यूँ मेरी तरह रातों को रहता है परेशान,
चाँद बता किस से तेरी आँख लड़ी है…. 

चाँद को चाहने वाले हजारों हैं,
पर देखना ये है कि चाँद किस पर फ़िदा होता है।

चाँद की रोशनी में तुम्हारा प्यार है
तुम्हारे बिना दिल मेरा तड़पता है

चाँदनी रातों में चाँद की रौशनी,
हर दिल को मोह लेती है कहानी..!!!

चाँद की चाँदनी में तुम्हारी याद है
तुम्हारे बिना रात अंधेरी है

तुम्हारी मुस्कान चाँद की तरह है
तुम्हारे बिना दिल मेरा अधूरा है

चाँद की रोशनी में तुम्हारा चेहरा है
तुम्हारे बिना जीवन मेरा अधूरा है

तुम्हारी आँखों में चाँद की चमक है
तुम्हारे बिना दिल मेरा तड़पता है

मुझको मालूम है महबूब-परस्ती का अज़ाब,
देर से चाँद निकलना भी गलत लगता है। 

वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा,
तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से ही मैं..!! 

वक़्त के साथ बदल जाता है हर चेहरा,
क़्त के साथचाँद भी हमेशा अधूरा नहीं रहता। 

चाँद धीरे से मुस्कुराया है
चाँद को कौन याद आया ह

रहने दो अभी चाँद सा चेहरा मिरे आगे
मय और पिलाओ कि अभी रात बहुत है….

सारी रात गुजारी हमने इसी इंतजार में की,
अब तो चाँद निकलेगा आधी रात में..

चुभती है क़ल्ब व जाँ में सितारों की रोशनी
ऐ चाँद डूब जा की तबियत उदास है !!

तोड़कर चाँद लगा तो दूँ मैँ तेरे माथे पर
आसमानों में मगर मसले खड़े हो जाएंगे

चाँद शायरी, चाँद को समर्पित एक काव्यात्मक अभिव्यक्ति है, जो अपनी पंक्तियों में चाहत और सुंदरता की भावना को समेटे होती है। चाँद अक्सर प्रेम, विरह और शांति का प्रतीक माना जाता है, और कवियों के लिए वह एक प्रेरणा और एक सच्चा साथी दोनों की तरह होता है।  

chand shayari on life
chand shayari on life

ऐ चाँद मुझे बता तू मेरा क्या लगता है
क्यूँ मेरे साथ सारी रात जगा करता है
मैं तो बन बैठा हूँ दीवाना उनके प्यार में
क्या तू भी किसी से बेपनाह मोहब्बत करता है।

तू चाँद और मैं सितारा होता
आसमान में एक आशियाना हमारा होता
लोग तुम्हे दूर से देखते
नज़दीक़ से देखने का हक़ बस हमारा होता

 पूछो इस चाँद से कैसे सिसकते थे हम
उन तन्हा रातों में तकिये से लिपटकर रोते थे हम
तूने तो देखा नही छोड़ने के बाद
दिल का हर एक राज़ चाँद से कहते थे हम।

ढूँढता हूँ मैं जब अपनी ही खामोशी को
मुझे कुछ काम नहीं दुनिया की बातों से
आसमाँ दे न सका चाँद अपने दामन का
माँगती रह गई धरती कई रातों से

पत्थर की दुनिया जज़्बात नहीं समझती
दिल में क्या है वो बात नहीं समझती
तन्हा तो चाँद भी सितारों के बीच में है
पर चाँद का दर्द वो रात नहीं समझती

ऐ चाँद मुझे बता तू मेरा क्या लगता है
क्यूँ मेरे साथ सारी रात जगा करता है
मैं तो बन बैठा हूँ दीवाना उनके प्यार में
क्या तू भी किसी से बेपनाह मोहब्बत करता है।

कितना हसीन चाँद सा चेहरा है,
उसपे शबाब का रंग गहरा है,
खुदा को यकीन न था वफ़ा पे,
तभी चाँद पे तारों का पहरा है।

तू अपनी निगाहों से न देख खुद को,
चमकता हीरा भी तुझे पत्थर लगेगा,
सब कहते होंगे चाँद का टुकड़ा है तू,

मेरी नजर से चांद तेरा टुकड़ा लगेगा..!!
फलक पे चांद सितारे निकलने हैं हर शब
सितम यही है निकलता नहीं हमारा चांद

कितना हसीन चाँद सा चेहरा है,
उसपे शबाब का रंग गहरा है,
खुदा को यकीन न था वफ़ा पे,
तभी चाँद पे तारों का पहरा है।

तू अपनी निगाहों से न देख खुद को,
चमकता हीरा भी तुझे पत्थर लगेगा,
सब कहते होंगे चाँद का टुकड़ा है तू,
मेरी नजर से चांद तेरा टुकड़ा लगेगा..!!

कितना हसीन चाँद सा चेहरा है,
उस पर शबाब का रंग गहरा है,
खुदा को यकीन न था वफ़ा पर,
तभी चाँद पर तारों का पहरा है..!!

ऐ चाँद मुझे बता तू मेरा क्या लगता है
क्यों मेरे साथ सारी रात जागा करता है
मैं तो बन बैठा हूँ दीवाना उनके प्यार में
क्या तू भी किसी से बेपनाह मोहब्बत करता है

कितना हसीन चाँद सा चेहरा है
उसपे शबाब का रंग गहरा है
खुदा को यकीन न था वफ़ा पे
तभी चाँद पे तारों का पहरा है

ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली आँखें
कोई राज़ है इनमें गहरा

रात को जब चाँद सितारे चमकते हैं,
हम हरदम आपकी याद में तड़पते हैं,
आप तो चले जाते हो छोड़कर हमें,
हम रात भर आपसे मिलने को तरसते हैं..!!

 चांद सा चेहरा देखने की इजाजत दे दो हमें
तुम्हें अपना बनाने की इजाजत दे दो हमें
हम इश्क करना चाहते हैं तुमसे
इश्क करने की इजाजत दे दो हमें !

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चाँद की रातें जब बिखेरती हैं अपने जादू, तो शायरी का भी एक अलग ही रंग होती है। “चाँद तेरा नूर, हर दिल की ज़रूरत” जैसे बोल तो सिर्फ शुरुआत होते हैं, लेकिन हर शायरी उस चाँद की महक को अलग तरीके से बयां करती है। 

Chand quotes in English
Chand quotes in English

चाँद तुम जैसा होता…
थोड़ा ख़ूबसूरत, थोड़ा रूठा।

रात को चाँद बहुत अच्छा लगता है,
क्योंकि उसकी रोशनी में यादें साफ़ दिखती हैं।

कभी-कभी चाँद देखकर लगता है कि
ख़ामोशी भी कितनी हसीन होती है।

चाँद और मोहब्बत दोनों ही खूबसूरत होते हैं,
बस देखने वाला दिल चाहिए।

चाँद रात का नहीं,
आशिक़ों के दिल का भी साथी होता है।

रहने दो अभी चाँद सा चेहरा मिरे आगे
मय और पिलाओ कि अभी रात बहुत है….

सारी रात गुजारी हमने इसी इंतजार में की,
अब तो चाँद निकलेगा आधी रात में..!!

इश्क तेरी इन्तेहाँ इश्क मेरी इन्तेहाँ,
तू भी अभी न-तमाम मैं भी अभी न-तमाम

पूछा जो उनसे चाँद निकलता है किस तरह
ज़ुल्फ़ों को रूख पे डाल के झटका दिया कि यूँ !!

चाँद धीरे से मुस्कुराया है
चाँद को कौन याद आया है

तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है !

आती हो जाती हो लेकिन दिखती नहीं
मुझ से इतनी आँख-मिचोली अच्छी नहीं

मै उसको चाँद कह दू ये मुमकिन तो है,
मगर लोग उसे रात भर देखें ये मुझे गवारा नहीं…. 

चाँद है ज़ेरे-क़दम सूरज खिलौना हो गया
हाँ, मगर इस दौर में क़िरदार बौना हो गया…. 

हुआ था शोर पिछली रात को दो चाँद निकले थे,
बताओ क्या ज़रुरत थी तुम्हे छत पर टहलने की…. 

तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है,
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है। 

चाँद से कह दो अपनी हदों में रहे,
मेरे महबूब का सजना अभी बाकी है। 

पूछो इस चाँद से कैसे सिसकते थे हम,
उन तन्हा रातों में तकिये से लिपटकर रोते थे हम 

जैसे चाँद के होने से रोशन है यह रातें,
ठीक उसी प्रकार तुम्हारे होने से रोशन है मेरी जिंदगी। 

बज़्म-ए-ख़याल में तिरे हुस्न की शम्अ जल गई,
दर्द का चाँद बुझ गया हिज्र की रात ढल गई!

ऐ चाँद मुझे बता तू मेरा क्या लगता है,
क्यूँ मेरे साथ सारी रात जगा करता है। 

चुभती है क़ल्ब व जाँ में सितारों की रोशनी,
ऐ चाँद डूब जा की तबियत उदास है! 

जिस चांद के हजारों हो चाहने वाले,
वो क्या समझेगा एक सितारे की कमी को।

 इश्क करना होतो रात की तरह करो,
जिसे चाँद भी पसंद हो और दाग भी कबूल ना हो।

एक तेरा नाम रहे मेरी ज़ुबान पे,
जैसे चाँद रहता है उस आसमान पे।

आप वो चाँद हो जिसकी रोशनी सब पर नहीं पड़ती
हम खुश नसीब हैं जो आप हमें रोशन कर देते हो।

ना चांद की जरूरत है, ना फलक की जरूरत है,
हमें तो सिर्फ तेरी एक झलक की जरूरत है।

चाँद मेरा दिल, चाँदनी हो तुमचाँद से है दूर, चाँदनी कहाँ
लौट के आना है यहीं तुम्हेंजा रहे हो तुम, जाओ मेरी जान…

चौदहवीं का चाँद हो, या आफ़ताब हो
जो भी हो तुम, खुदा की कसम, लाजवाब हो

 चाँद सी महबूबा हो मेरी, कब ऐसा मैंने सोचा था
हाँ तुम बिलकुल वैसी हो, जैसा मैंने सोचा था…

 रोज़ तारों की नुमाइश में खलल पड़ता है,
यह चाँद पागल है अंधेरे में निकल पड़ता है

 तन्हा तो चाँद भी सितारों के बीच में है,
पर चाँद का दर्द वो रात नहीं समझती।

पत्थर की दुनिया जज़्बात नहीं समझती,
दिल में क्या है वो बात नहीं समझती।

  वक़्त के साथ बदल जाता है हर चेहरा,
वक़्त के साथ चाँद भी हमेशा अधूरा नहीं रहता।

चाँद के साथ रात गुजर जाती है,
तेरी याद दिल में एक आग लगाती

चाँद मेरा दिल, चाँदनी हो तुमचाँद से है दूर, चाँदनी कहाँ
लौट के आना है यहीं तुम्हेंजा रहे हो तुम, जाओ मेरी जान…

चाँद पर शायरी की दुनिया में एक अद्वितीय जादू है। जब चाँद की हल्की रोशनी रात के अंधेरों को चीरती है, तो मन में अनगिनत भावनाएँ उमड़ने लगती हैं। यह चाँद, जो सदियों से प्रेम, विरह और सपना देखन के प्रतीक के रूप में चमक रहा है, हमें अपने अनुभवों को शब्दों में पिरोने की प्रेरणा देता है। 

chand shayari for girl
chand shayari for girl

कई चाँद थे सर-ए-आसमाँ कि चमक चमक के पलट गए
न लहू मिरे ही जिगर में था न तुम्हारी ज़ुल्फ़ सियाह थी

कल रात इक तारा देखा टूटता हुआ बिल्कुल मेरे जैसा
चांद को जरा भी फर्क न पड़ा क्योंकि वो भी है तेरे जैसा !!

चाहते तो हम भी तुम्हें एक जमाने से थे,
मगर यह चांद कब मोहब्बत करने वालों का हुआ है.

दिल की बातें छुपा रखीं चाँदनी ने,
सपनों को भी रोशन कर दिया चाँद ने।

बेचैन इस कदर था कि सोया नही रात भर
पलकों से लिख रहा था तेरा नाम चांद पर !

अब चांद में भी नजर आने लगा है चेहरा उनका
जबसे इजहार-ए -मोहब्बत हुआ है उनका !!

तेरे चेहरे का नूर कुछ ऐसा छाया है,
चाँद भी अब तो मुरझाया सा लगता है।

वो पलकें झुकाकर अक्सर यूं शर्माते हैं
जब हम उन्हें प्यार से चांद कहकर बुलाते हैं !!

चाँद के दीदार में तुम छत पर क्या चली आई,
शहर में ईद की तारीख मुक्कमल हो गयी…

हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं

तुम हंस दो तो रात भी चाँदनी बन जाए,
तुम्हें देख कर तो चाँद भी शर्मा जाए।

तुम जिद चाँद की करो
मै तुम्हे आईना दिखा दूंगा।

चांद से तो हर किसी को प्यार है,
मैं खुशनसीब हूं कि चांद को मुझसे प्यार है..!!

लोग पूछते हैं कि हम चांद को यूं बार बार देखते क्यों हैं,
अब उन्हें कौन समझाए की चांद में हमें महबूब नजर आता है..!! 

न चांद की चाहन फलक का इंतजार है,
कैसे कहूंमुझे बस तुझसे ही प्यार है..!!

आज टूटेगा गुरूर चाँद का तुम देखना यारो,
आज मैंने उन्हें छत पर बुला रखा है..!!

अब चांद में भी नजर आने लगा है चेहरा उनका,
जबसे इजहार-ए-मोहब्बत हुआ है उनका।

वो पलकें झुकाकर अक्सर यूं शर्माते हैं,
जब हम उन्हें प्यार से चांद कहकर बुलाते हैं।

फूल गुल शम्स ओ क़मर सारे ही थे
पर हमें उन में तुम्हीं भाए बहुत

चांद की रोशनी भी लगती है अधूरी आज रात
शायद कोई ग़म है उसके दिल में भी मेरे साथ !!

यकीन चांद से हो सूरज पर ऐतबार भी रख,
मगर निगाहों में थोड़ा सा इंतजार भी रख.

क्यूँ मेरी तरह रातों को रहता है परेशाँ,
ऐ चाँद बता किस से तेरी आँख लड़ी है।

चाँद की नूरानी छाँव में जब रात सिमट जाती है,
दिल के हर ग़म को वो शांति में बदल जाती है..!

उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा
आसमां पे चांद पूरा था मगर आधा लगा !

मैं हर रात सारी ख़्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता हूँ,
मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती हैं।

चाँद अपने आप को कहते हो तुम
आओ देखें हो गई है रात भी….

फ़लक पे चाँद सितारे निकलने हैं हर शब
सितम यही है निकलता नहीं हमारा चाँद

चाँद जैसी नूरी हो तुम,
दिल की धड़कन पूरी हो तुम।

काश हमारी क़िस्मत में ऐसी भी कोई शाम आ जाए
एक चाँद फ़लक पर निकला हो एक छत पर आ जाए।

चाँद की तरह तुम भी नाज़ुक और हसीन हो,
मेरी हर धड़कन की सबसे ख़ूबसूरत तमीज़ हो।

रात का चाँद भी फीका लगे,
जब तुम्हारा चेहरा सामने आए।

चाँद को देखने से बेहतर है तुम्हें देखना,
क्योंकि तुममें ही तो मेरी दुनिया बसती है।

तुम्हारी ख़ूबसूरती को चाँद भी सलाम करे,
इतनी प्यारी हो तुम कि ज़माना भी क़ायम करे।

काश मैं उनका अंबर वह मेरी चाँद बन जाए,
कुछ इस तरह हम दोनों एक दूसरे के हो जाएं। 

बुझ गये ग़म की हवा से प्यार के जलते चिराग,
बेवफ़ाई चाँद ने भी तो पड़ गया इसमें दाग। 

जिस चाँद के हजारों हो चाहने वाले,
वो क्या समझेगा एक सितारे की कमी को !

चाँद के दीदार में तुम छत पर क्या चली आई,
शहर में ईद की तारीख मुकम्मल हो गई…. 

पेड़ के नीचे ज़रा सी छाँव जो उस को मिली
सो गया मज़दूर तन पर बोरिया ओढ़े हुए

छुप गया ईद का चाँद निकल कर देर हुई पर जाने क्यों
नज़रें अब तक टिकी हुई हैं मस्जिद के मीनारों पर

आँख जब सूरज की पथराने लगी
चाँद से चेहरे शहाबी हो गए

चाँद ने आज जब इक नाम लिया आख़िर-ए-शब
दिल ने ख़्वाबों से बहुत काम लिया आख़िर-ए-शब

चेहरे शादाबी से आरी आँखें नूर से ख़ाली हैं
किस के आगे हाथ बढ़ाऊँ सारे हाथ सवाली हैं

चाँद से तुझ को जो दे निस्बत सो बे-इंसाफ़ है
चाँद के मुँह पर हैं छाईं तेरा मुखड़ा साफ़ है

ऐ काश हमारी क़िस्मत में ऐसी भी कोई शाम आ जाए
इक चाँद फ़लक पर निकला हो इक चाँद सर-ए-बाम आ जाए

पाँव साकित हो गए ‘सरवत’ किसी को देख कर
इक कशिश महताब जैसी चेहरा-ए-दिलबर में थी

रात को रोज़ डूब जाता है
चाँद को तैरना सिखाना है

ये किस ज़ोहरा-जबीं की अंजुमन में आमद आमद है
बिछाया है क़मर ने चाँदनी का फ़र्श महफ़िल में

वो चार चाँद फ़लक को लगा चला हूँ ‘क़मर’
कि मेरे बा’द सितारे कहेंगे अफ़्साने

चाँद में तू नज़र आया था मुझे
मैं ने महताब नहीं देखा था

रुस्वा करेगी देख के दुनिया मुझे ‘क़मर’
इस चाँदनी में उन को बुलाने को जाए कौन

सब सितारे दिलासा देते हैं
चाँद रातों को चीख़ता है बहुत

तुम जिसे चाँद कहते हो वो अस्ल में
आसमाँ के बदन पर कोई घाव है

चाँद शायरी का एक अनोखा आकर्षण होता है, जो समय से परे जाकर रात के आसमान के रहस्य और इंसानी भावनाओं की गहराइयों को एक साथ पिरो देता है। हर दो पंक्तियों की कविता एक नाज़ुक धागे की तरह होती है, जो प्रेमियों और सपने देखने वालों को चाँद की मोहक रोशनी से जोड़ती है।

नहीं कर सकता कोई वैज्ञानिक मेरी बराबरी,
मैं चाँद देखने साइकिल से जाया करता था!

ना चाँद चाहिए ना फलक चाहिए
मुझे बस तेरी की एक झलक चाहिए !!

रात भर तेरी तारीफ़ करता रहा चाँद से
चाँद इतना जला कि सूरज हो गया

इश्क तेरी इन्तेहाँ इश्क मेरी इन्तेहाँ,
तू भी अभी न-तमाम मैं भी अभी न-तमाम।

चाँद धीरे से मुस्कुराया है
चाँद को कौन याद आया है

इश्क तेरी इन्तेहाँ इश्क मेरी इन्तेहाँ,
तू भी अभी न-तमाम मैं भी अभी न-तमाम।

चाँद धीरे से मुस्कुराया है
चाँद को कौन याद आया है

चाँदनी रातो में चाँद की रौशनी
हर दिल को मोह लेती है कहानी..!

रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है !

चांद मुंह पर आकर बैठ गया हो ऐसा तुम्हें रूप मिला है
मुस्कुराता हुआ चांद जैसे अभी अभी खिला है !!

खूबसूरत गज़ल जैसा है तेरा चाँद सा चेहरा
निगाहे शेर पढ़ती हैं तो लब इरशाद करते है।

चाँद में नज़र कैसे आए तेरी सूरत मुझको,
आँधियों से आसमाँ का रंग मैला हो गया..!

आज फिर चाँद देर से निकला
तुम ने फिर देर कर दी आने में.

इतने घने बादल के पीछे
कितना तन्हा होगा चाँद

चलो चाँद का किरदार अपना लें हम दोस्तो,
दाग अपने पास रखें और रौशनी बाँट दें।

चलो चाँद का किरदार अपना लें हम दोस्तो
दाग अपने पास रखें और रौशनी बाँट दें।

दो पल जिंदगी के, तेरे साथ गुजारे है ए जान
तुम ही तो एक चाँद हो, बाकि सब सितारे हैं !!

तू पास हो तो रातों में रौशनी है,
तेरे बिना चाँद भी सुनी-सुनी है

तेरी मुस्कान में चाँद का जादू है,
तेरे साथ हर रात का अपना अंदाज़ है।

चाँद की खामोशी में तेरा नाम लिया,
दिल के हर कोने में प्यार बसा लिया।

तेरे बिना चाँद भी अकेला लगता है,
तुम मिले तो हर सपना पूरा लगता है।

रात की ठंडी हवा में तेरा नाम लिया,
चाँदनी भी तेरी याद में बह चली।

तू मेरा चाँद, मैं तेरा दीवाना,
साथ रहकर बन जाए हर रात सुहाना।

चाँद की रोशनी में दिल तेरा ढूंढे,
तेरे बिना सब कुछ अधूरा लगे।

रात भर तेरी याद में खोया रहा,
चाँद की रोशनी ने साथ निभाया।

तेरे प्यार में हर रात चमकती है,
चाँद भी तेरे आगे फीका लगता है।

चाँद से पूछा मैंने तेरा नाम,
उसने कहा बस तुम ही हो मेरा काम।

तेरी आँखों में तारा सा चमक है,
तेरे बिना चाँद भी बुझा सा लगता है।

हर चाँदनी रात में तेरा इंतजार है,
तेरे बिना दिल मेरा बेकार है।

हर पूरी चाँदनी में तेरा अक्स दिखता है,
तेरे प्यार में मेरा दिल खिलता है।

चाँद की रौशनी और तेरी हँसी,
मिलकर बनाते हैं रातों को खूबसूरत।

पूर्णिमा की रात में दिल तेरा ढूंढे,
तेरे बिना सब कुछ अधूरा लगे।

चाँद की सफ़ेदी में तेरा नाम लिखा,
हर रात बस तुझसे प्यार किया।

तेरे बिना चाँद भी अकेला लगता है,
तू मिले तो हर सपना पूरा लगता है।

रात की ठंडी हवा में तेरा नाम लिया,
चाँदनी भी तेरी याद में बह चली।

यकीन चांद से हो सूरज पर ऐतबार भी रख
मगर निगाहों में थोड़ा सा इंतजार भी रख

पूछो इस चांद से कैसे सिसकते थे हम
उन तन्हा रातों में तकिए से लिपटकर रोते थे हम

तूने तो देखा नहीं छोड़ने के बाद दिल
का हर एक राज़ चाँद से कहते थे हम

ना छत पर कभी आता ना घर से कभी निकलता है
मेरा महबूब चांद की तरह घटाओ में छुपता है

चलो चांद का किरदार अपना ले
हम दाग अपने पास रखें और रोशनी बांट दें

का आकर्षण Chand Shayari in Hindi का आकर्षण इस बात में निहित है कि यह उन भावनाओं को व्यक्त करने में सक्षम होती है जिन्हें शब्द अक्सर पूरी तरह से बयान नहीं कर पाते। इसकी पंक्तियाँ चाँदनी रात से प्रेरित प्रेम, यादों की मिठास और शांति की भावना को समेटे होती हैं। इस विधा से जुड़ना हमें अपने अनुभवों पर विचार करने और अपने आसपास की सुंदरता को महसूस करने के लिए प्रेरित करता है। 

जब आप इस खूबसूरत शायरी के संग्रह में गहराई से उतरते हैं, तो आपको प्रेम और विरह की अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की प्रेरणा मिल सकती है। आप इन मनमोहक शायरियों को अपने प्रियजनों के साथ साझा करने में संकोच न करें और चाँदनी को अपने रिश्तों में अपना जादू बिखेरने दें। 

What is the Meaning of Chand in Poetry?

In poetry, “Chand” typically refers to a moon or moonlight, symbolizing beauty, serenity, and often introspection. The moon has long been a popular motif in literature, representing not just physical beauty but also emotional depth and longing.

How do You Spell Chand?

The spelling “Chand” is indeed correct for various contexts, particularly in certain languages and cultures. For example, in Hindi and other Indian languages, “Chand” (चाँद) means “moon.” It can also be a common surname or part of names in South Asia. 

What Does “Chand” Mean?

“Chand” is a word of Persian origin that translates to “moon” in several South Asian languages, including Hindi and Urdu. It often carries connotations of beauty and romance, reflecting the moon’s soft glow and its significance in poetry and art.

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