190+ New Chand Shayari In Hindi Heart Touching – 2026
चाँद ने हमेशा से शायरों के दिलों में एक खास जगह बनाई है, जो प्रेम और चाहत की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए एक शाश्वत प्रेरणा रहा है।Chand Shayari in Hindi यह इन भावनाओं को बेहद खूबसूरती से समेटता है, जहाँ रोमांस रात के आसमान की शांत और मनमोहक सुंदरता के साथ घुल-मिल जाता है।
अंत तक पहुँचते-पहुँचते, आप न केवल इस काव्य शैली की सराहना करेंगे, बल्कि इसकी खूबसूरती के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए भी प्रेरित होंगे।
Chand Shayari in Hindi
हर चाँद की रात जब सन्नाटा छा जाता है, तब शायर अपने दिल की बातों को कागज पर उतारता है। “इस चाँद के साए में तेरी यादों की छांव,” जैसे बोल हम सभी के भीतर गहरी भावनाओं को जगाते हैं। शायरी में चाँद का प्रतीकात्मक उपयोग हमें यह सिखाता है कि प्रेम, जैसे चाँद की रोशनी, कभी न खत्म होने वाला सफर है।

चाँद के दीदार में तुम छत पर क्या चली आई,
शहर में ईद की तारीख मुक्कमल हो गयी….
इश्क तेरी इन्तेहाँ इश्क मेरी इन्तेहाँ,
तू भी अभी न-तमाम मैं भी अभी न-तमाम।
एक तेरा नाम रहे मेरी जुबान पे
जैसे चांद रहता है उस आसमान पे।
तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है !
सारी रात गुजारी हमने इसी इंतजार में की,
अब तो चाँद निकलेगा आधी रात में..
रहने दो अभी चाँद सा चेहरा मिरे आगे
मय और पिलाओ कि अभी रात बहुत है….
चाँद होता न आसमाँ पे अगर
हम किसे आप सा हसीं कहते….
एक चांद कहकर गया मुझसे आज निकलेगा ज़रूर
एक निगाह लिए बैठा हूं आज सुबह से मै !!
चांद नजर आया खुशियों की सौगात लाया
आपको और अपनों को ईद का ये पर्व मुबारक लाया !!
खूबसूरत गज़ल जैसा है तेरा चाँद सा चेहरा
निगाहे शेर पढ़ती हैं तो लब इरशाद करते है।
आज फिर चाँद देर से निकला
तुम ने फिर देर कर दी आने में.
चाँद में नज़र कैसे आए तेरी सूरत मुझको,
आँधियों से आसमाँ का रंग मैला हो गया..!!
न चाहकर भी मेरे लब पर ये फरियाद आ जाती है,
ऐ चाँद सामने न आ, किसी की याद आ जाती है।
जिक्र तेरी खूबसूरती का जो किया तो वो चांद भी शरमाया,
हम किस्से पर किस्सा सुनाते गए वो बादलों में गुम होता गया।
वो पानी में जब अपनी छब देखता है तो मैं भी,
नदी चाँदनी में नहाते हुए देखता हूँ।
तुझको देखा तो फिर उसको ना देखा मैंने
चाँद कहता रह गया मैं चाँद हूँ मैं चाँद हूँ
क्यूँ मेरी तरह रातों को रहता है परेशान,
चाँद बता किस से तेरी आँख लड़ी है….
चाँद को चाहने वाले हजारों हैं,
पर देखना ये है कि चाँद किस पर फ़िदा होता है।
चाँद की रोशनी में तुम्हारा प्यार है
तुम्हारे बिना दिल मेरा तड़पता है
चाँदनी रातों में चाँद की रौशनी,
हर दिल को मोह लेती है कहानी..!!!
चाँद की चाँदनी में तुम्हारी याद है
तुम्हारे बिना रात अंधेरी है
तुम्हारी मुस्कान चाँद की तरह है
तुम्हारे बिना दिल मेरा अधूरा है
चाँद की रोशनी में तुम्हारा चेहरा है
तुम्हारे बिना जीवन मेरा अधूरा है
तुम्हारी आँखों में चाँद की चमक है
तुम्हारे बिना दिल मेरा तड़पता है
मुझको मालूम है महबूब-परस्ती का अज़ाब,
देर से चाँद निकलना भी गलत लगता है।
वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा,
तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से ही मैं..!!
वक़्त के साथ बदल जाता है हर चेहरा,
क़्त के साथचाँद भी हमेशा अधूरा नहीं रहता।
चाँद धीरे से मुस्कुराया है
चाँद को कौन याद आया ह
रहने दो अभी चाँद सा चेहरा मिरे आगे
मय और पिलाओ कि अभी रात बहुत है….
सारी रात गुजारी हमने इसी इंतजार में की,
अब तो चाँद निकलेगा आधी रात में..
चुभती है क़ल्ब व जाँ में सितारों की रोशनी
ऐ चाँद डूब जा की तबियत उदास है !!
तोड़कर चाँद लगा तो दूँ मैँ तेरे माथे पर
आसमानों में मगर मसले खड़े हो जाएंगे
Chand Shayari
चाँद शायरी, चाँद को समर्पित एक काव्यात्मक अभिव्यक्ति है, जो अपनी पंक्तियों में चाहत और सुंदरता की भावना को समेटे होती है। चाँद अक्सर प्रेम, विरह और शांति का प्रतीक माना जाता है, और कवियों के लिए वह एक प्रेरणा और एक सच्चा साथी दोनों की तरह होता है।

ऐ चाँद मुझे बता तू मेरा क्या लगता है
क्यूँ मेरे साथ सारी रात जगा करता है
मैं तो बन बैठा हूँ दीवाना उनके प्यार में
क्या तू भी किसी से बेपनाह मोहब्बत करता है।
तू चाँद और मैं सितारा होता
आसमान में एक आशियाना हमारा होता
लोग तुम्हे दूर से देखते
नज़दीक़ से देखने का हक़ बस हमारा होता
पूछो इस चाँद से कैसे सिसकते थे हम
उन तन्हा रातों में तकिये से लिपटकर रोते थे हम
तूने तो देखा नही छोड़ने के बाद
दिल का हर एक राज़ चाँद से कहते थे हम।
ढूँढता हूँ मैं जब अपनी ही खामोशी को
मुझे कुछ काम नहीं दुनिया की बातों से
आसमाँ दे न सका चाँद अपने दामन का
माँगती रह गई धरती कई रातों से
पत्थर की दुनिया जज़्बात नहीं समझती
दिल में क्या है वो बात नहीं समझती
तन्हा तो चाँद भी सितारों के बीच में है
पर चाँद का दर्द वो रात नहीं समझती
ऐ चाँद मुझे बता तू मेरा क्या लगता है
क्यूँ मेरे साथ सारी रात जगा करता है
मैं तो बन बैठा हूँ दीवाना उनके प्यार में
क्या तू भी किसी से बेपनाह मोहब्बत करता है।
कितना हसीन चाँद सा चेहरा है,
उसपे शबाब का रंग गहरा है,
खुदा को यकीन न था वफ़ा पे,
तभी चाँद पे तारों का पहरा है।
तू अपनी निगाहों से न देख खुद को,
चमकता हीरा भी तुझे पत्थर लगेगा,
सब कहते होंगे चाँद का टुकड़ा है तू,
मेरी नजर से चांद तेरा टुकड़ा लगेगा..!!
फलक पे चांद सितारे निकलने हैं हर शब
सितम यही है निकलता नहीं हमारा चांद
कितना हसीन चाँद सा चेहरा है,
उसपे शबाब का रंग गहरा है,
खुदा को यकीन न था वफ़ा पे,
तभी चाँद पे तारों का पहरा है।
तू अपनी निगाहों से न देख खुद को,
चमकता हीरा भी तुझे पत्थर लगेगा,
सब कहते होंगे चाँद का टुकड़ा है तू,
मेरी नजर से चांद तेरा टुकड़ा लगेगा..!!
कितना हसीन चाँद सा चेहरा है,
उस पर शबाब का रंग गहरा है,
खुदा को यकीन न था वफ़ा पर,
तभी चाँद पर तारों का पहरा है..!!
ऐ चाँद मुझे बता तू मेरा क्या लगता है
क्यों मेरे साथ सारी रात जागा करता है
मैं तो बन बैठा हूँ दीवाना उनके प्यार में
क्या तू भी किसी से बेपनाह मोहब्बत करता है
कितना हसीन चाँद सा चेहरा है
उसपे शबाब का रंग गहरा है
खुदा को यकीन न था वफ़ा पे
तभी चाँद पे तारों का पहरा है
ये चाँद सा रोशन चेहरा
जुल्फों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली आँखें
कोई राज़ है इनमें गहरा
रात को जब चाँद सितारे चमकते हैं,
हम हरदम आपकी याद में तड़पते हैं,
आप तो चले जाते हो छोड़कर हमें,
हम रात भर आपसे मिलने को तरसते हैं..!!
चांद सा चेहरा देखने की इजाजत दे दो हमें
तुम्हें अपना बनाने की इजाजत दे दो हमें
हम इश्क करना चाहते हैं तुमसे
इश्क करने की इजाजत दे दो हमें !
Chand Shayari Love
चांद शायरी प्रेम की एक ऐसी भावपूर्ण अभिव्यक्ति है जो चांद की क्षणभंगुर सुंदरता और मानवीय भावनाओं की गहराई को एक साथ पिरोती है। चांद, जिसे अक्सर कविता में प्रेमी के रूप में चित्रित किया जाता है, स्नेह की निरंतरता का प्रतीक है, जो तड़प की सबसे अंधेरी रातों को भी रोशन कर देता है।

तेरी मोहब्बत में चाँद भी दीवाना है
हर रात मेरी धड़कन तेरे नाम गाती है
रात की चाँदनी में तेरी मुस्कान खिलती है
मेरी तन्हाई को तेरी यादों की खुशबू सजाती है
चाँद के नीचे तेरी हँसी मेरे ख्वाबों में आती है
हर पल मेरी मोहब्बत तुझसे ही रोशन है
तेरी यादों की चाँदनी हर रात मेरे दिल को छूती है
मेरी तन्हाई में बस तेरा ही नूर है
रात की खामोशी में चाँद भी मेरी तन्हाई सुनता है
तेरी मोहब्बत हर पल मुझे जीना सिखाती है
चाँद की ठंडी रौशनी में तेरी गर्मी महसूस होती है
मेरे ख्वाबों की दुनिया बस तुझसे ही रोशन है
तेरी मोहब्बत में चाँद भी दीवाना है
मेरी तन्हाई में तेरी यादें सदा रहती हैं
चाँद की रौशनी में तेरी मुस्कान चमकती है
मेरे ख्वाबों की दुनिया बस तुझसे ही रोशन है
रात की तन्हाई में तेरे ख्याल साथ चलते हैं
चाँद भी मेरी दिल की धड़कन सुनता है
तेरी यादों की चाँदनी हर रात मुझे जीना सिखाती है
मेरी मोहब्बत हर पल तेरे नाम गाती है
चाँद की रौशनी में तेरी यादें चमकती हैं
मेरी तन्हाई बस तेरे ख्यालों में बसती है
तेरी मोहब्बत में चाँद भी दीवाना है
हर रात मेरी धड़कन तेरे नाम गाती है
रात की चाँदनी में तेरी मुस्कान खिलती है
मेरी तन्हाई को तेरी यादों की खुशबू सजाती है
चाँद के नीचे तेरी हँसी मेरे ख्वाबों में आती है
हर पल मेरी मोहब्बत तुझसे ही रोशन है
Chand Shayari 2 Line
चाँद शायरी का एक अनोखा आकर्षण होता है, जो समय से परे जाकर रात के आसमान के रहस्य और इंसानी भावनाओं की गहराइयों को एक साथ पिरो देता है। हर दो पंक्तियों की कविता एक नाज़ुक धागे की तरह होती है, जो प्रेमियों और सपने देखने वालों को चाँद की मोहक रोशनी से जोड़ती है।

नहीं कर सकता कोई वैज्ञानिक मेरी बराबरी,
मैं चाँद देखने साइकिल से जाया करता था!
ना चाँद चाहिए ना फलक चाहिए
मुझे बस तेरी की एक झलक चाहिए !!
रात भर तेरी तारीफ़ करता रहा चाँद से
चाँद इतना जला कि सूरज हो गया
इश्क तेरी इन्तेहाँ इश्क मेरी इन्तेहाँ,
तू भी अभी न-तमाम मैं भी अभी न-तमाम।
चाँद धीरे से मुस्कुराया है
चाँद को कौन याद आया है
इश्क तेरी इन्तेहाँ इश्क मेरी इन्तेहाँ,
तू भी अभी न-तमाम मैं भी अभी न-तमाम।
चाँद धीरे से मुस्कुराया है
चाँद को कौन याद आया है
चाँदनी रातो में चाँद की रौशनी
हर दिल को मोह लेती है कहानी..!
रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है !
चांद मुंह पर आकर बैठ गया हो ऐसा तुम्हें रूप मिला है
मुस्कुराता हुआ चांद जैसे अभी अभी खिला है !!
खूबसूरत गज़ल जैसा है तेरा चाँद सा चेहरा
निगाहे शेर पढ़ती हैं तो लब इरशाद करते है।
आज फिर चाँद देर से निकला
तुम ने फिर देर कर दी आने में.
चाँद में नज़र कैसे आए तेरी सूरत मुझको,
आँधियों से आसमाँ का रंग मैला हो गया..!
इतने घने बादल के पीछे
कितना तन्हा होगा चाँद
चलो चाँद का किरदार अपना लें हम दोस्तो,
दाग अपने पास रखें और रौशनी बाँट दें।
चलो चाँद का किरदार अपना लें हम दोस्तो,
दाग अपने पास रखें और रौशनी बाँट दें।
दो पल जिंदगी के, तेरे साथ गुजारे है ए जान
तुम ही तो एक चाँद हो, बाकि सब सितारे हैं !!
तू पास हो तो रातों में रौशनी है,
तेरे बिना चाँद भी सुनी-सुनी है
तेरी मुस्कान में चाँद का जादू है,
तेरे साथ हर रात का अपना अंदाज़ है।
चाँद की खामोशी में तेरा नाम लिया,
दिल के हर कोने में प्यार बसा लिया।
तेरे बिना चाँद भी अकेला लगता है,
तुम मिले तो हर सपना पूरा लगता है।
रात की ठंडी हवा में तेरा नाम लिया,
चाँदनी भी तेरी याद में बह चली।
तू मेरा चाँद, मैं तेरा दीवाना,
साथ रहकर बन जाए हर रात सुहाना।
चाँद की रोशनी में दिल तेरा ढूंढे,
तेरे बिना सब कुछ अधूरा लगे।
रात भर तेरी याद में खोया रहा,
चाँद की रोशनी ने साथ निभाया।
तेरे प्यार में हर रात चमकती है,
चाँद भी तेरे आगे फीका लगता है।
चाँद से पूछा मैंने तेरा नाम,
उसने कहा बस तुम ही हो मेरा काम।
तेरी आँखों में तारा सा चमक है,
तेरे बिना चाँद भी बुझा सा लगता है।
हर चाँदनी रात में तेरा इंतजार है,
तेरे बिना दिल मेरा बेकार है।
हर पूरी चाँदनी में तेरा अक्स दिखता है,
तेरे प्यार में मेरा दिल खिलता है।
चाँद की रौशनी और तेरी हँसी,
मिलकर बनाते हैं रातों को खूबसूरत।
पूर्णिमा की रात में दिल तेरा ढूंढे,
तेरे बिना सब कुछ अधूरा लगे।
चाँद की सफ़ेदी में तेरा नाम लिखा,
हर रात बस तुझसे प्यार किया।
तेरे बिना चाँद भी अकेला लगता है,
तू मिले तो हर सपना पूरा लगता है।
रात की ठंडी हवा में तेरा नाम लिया,
चाँदनी भी तेरी याद में बह चली।
यकीन चांद से हो सूरज पर ऐतबार भी रख
मगर निगाहों में थोड़ा सा इंतजार भी रख
पूछो इस चांद से कैसे सिसकते थे हम
उन तन्हा रातों में तकिए से लिपटकर रोते थे हम
तूने तो देखा नहीं छोड़ने के बाद दिल
का हर एक राज़ चाँद से कहते थे हम
ना छत पर कभी आता ना घर से कभी निकलता है
मेरा महबूब चांद की तरह घटाओ में छुपता है
चलो चांद का किरदार अपना ले
हम दाग अपने पास रखें और रोशनी बांट दें
Chand Shayari Hindi
हर चाँद की रात जब सन्नाटा छा जाता है, तब शायर अपने दिल की बातों को कागज पर उतारता है। “इस चाँद के साए में तेरी यादों की छांव,” जैसे बोल हम सभी के भीतर गहरी भावनाओं को जगाते हैं। शायरी में चाँद का प्रतीकात्मक उपयोग हमें यह सिखाता है कि प्रेम, जैसे चाँद की रोशनी, कभी न खत्म होने वाला सफर है।

चाँद के दीदार में तुम छत पर क्या चली आई,
शहर में ईद की तारीख मुक्कमल हो गयी….
इश्क तेरी इन्तेहाँ इश्क मेरी इन्तेहाँ,
तू भी अभी न-तमाम मैं भी अभी न-तमाम।
एक तेरा नाम रहे मेरी जुबान पे
जैसे चांद रहता है उस आसमान पे।
तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है !
सारी रात गुजारी हमने इसी इंतजार में की,
अब तो चाँद निकलेगा आधी रात में..
रहने दो अभी चाँद सा चेहरा मिरे आगे
मय और पिलाओ कि अभी रात बहुत है….
चाँद होता न आसमाँ पे अगर
हम किसे आप सा हसीं कहते….
एक चांद कहकर गया मुझसे आज निकलेगा ज़रूर
एक निगाह लिए बैठा हूं आज सुबह से मै !!
चांद नजर आया खुशियों की सौगात लाया
आपको और अपनों को ईद का ये पर्व मुबारक लाया !!
खूबसूरत गज़ल जैसा है तेरा चाँद सा चेहरा
निगाहे शेर पढ़ती हैं तो लब इरशाद करते है।
आज फिर चाँद देर से निकला
तुम ने फिर देर कर दी आने में.
चाँद में नज़र कैसे आए तेरी सूरत मुझको,
आँधियों से आसमाँ का रंग मैला हो गया..!!
न चाहकर भी मेरे लब पर ये फरियाद आ जाती है,
ऐ चाँद सामने न आ, किसी की याद आ जाती है।
जिक्र तेरी खूबसूरती का जो किया तो वो चांद भी शरमाया,
हम किस्से पर किस्सा सुनाते गए वो बादलों में गुम होता गया।
वो पानी में जब अपनी छब देखता है तो मैं भी,
नदी चाँदनी में नहाते हुए देखता हूँ।
तुझको देखा तो फिर उसको ना देखा मैंने
चाँद कहता रह गया मैं चाँद हूँ मैं चाँद हूँ
क्यूँ मेरी तरह रातों को रहता है परेशान,
ऐ चाँद बता किस से तेरी आँख लड़ी है….
चाँद को चाहने वाले हजारों हैं,
पर देखना ये है कि चाँद किस पर फ़िदा होता है।
चाँदनी रातों में चाँद की रौशनी,
हर दिल को मोह लेती है कहानी..!!!
चाँद की रोशनी में तुम्हारा प्यार है
तुम्हारे बिना दिल मेरा तड़पता है
चाँद की चाँदनी में तुम्हारी याद है
तुम्हारे बिना रात अंधेरी है
तुम्हारी मुस्कान चाँद की तरह है
तुम्हारे बिना दिल मेरा अधूरा है
चाँद की रोशनी में तुम्हारा चेहरा है
तुम्हारे बिना जीवन मेरा अधूरा है
तुम्हारी आँखों में चाँद की चमक है
तुम्हारे बिना दिल मेरा तड़पता है
मुझको मालूम है महबूब-परस्ती का अज़ाब,
देर से चाँद निकलना भी गलत लगता है।
वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा,
तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से ही मैं..!!
वक़्त के साथ बदल जाता है हर चेहरा,
वक़्त के साथचाँद भी हमेशा अधूरा नहीं रहता।
चाँद धीरे से मुस्कुराया है
चाँद को कौन याद आया ह
रहने दो अभी चाँद सा चेहरा मिरे आगे
मय और पिलाओ कि अभी रात बहुत है….
सारी रात गुजारी हमने इसी इंतजार में की,
अब तो चाँद निकलेगा आधी रात में..
चुभती है क़ल्ब व जाँ में सितारों की रोशनी
ऐ चाँद डूब जा की तबियत उदास है !!
तोड़कर चाँद लगा तो दूँ मैँ तेरे माथे पर
आसमानों में मगर मसले खड़े हो जाएंगे
Also Read:250+ Top Moon Shayari In English Heart Touching Line – 2026
Chand Shayari Gulzar
चांद शायरी, विशेष रूप से महान गुलज़ार की रचना, चंद्रमा के अलौकिक आकर्षण को समाहित करती है और उसे प्रेम, लालसा और आत्मनिरीक्षण का प्रतीक बना देती है। गुलज़ार कुशलतापूर्वक चंद्रमा की प्रकाशमय सुंदरता को मानवीय भावनाओं की जटिलताओं के साथ पिरोते हैं, जिससे ऐसी कविताएँ रची जाती हैं जो पाठकों के दिलों को गहराई से छू जाती हैं।

चाँद की रौशनी में तेरी आँखें चमकती हैं
मेरे दिल की धड़कन तेरे नाम से भर जाती है
तेरी मोहब्बत में हर रात गुलज़ार हो जाती है
चाँद भी हमारी कहानी सुनकर मुस्कुराता है
चाँद के साए में तेरी यादें सजती हैं
हर पल मेरी धड़कन तुझसे ही रोशन होती है
रात की चाँदनी में तेरी हँसी गूंजती है
मेरी तन्हाई बस तेरे ख्यालों से महकती है
तेरे बिना चाँद भी अधूरा सा लगता है
मेरी मोहब्बत हर रात तेरे नाम गाती है
चाँद की ठंडी रोशनी में तेरी गर्मी महसूस होती है
मेरे ख्वाबों में तेरी यादें हमेशा रहती हैं
तेरी मुस्कान की चमक में चाँद भी जलता है
हर रात मेरी तन्हाई तेरी मोहब्बत से भर जाती है
रात की खामोशी में तेरी आवाज़ दिल को छूती है
चाँद भी मेरी तन्हाई में तेरा अक्स ढूँढता है
तेरी यादों की खुशबू चाँदनी की तरह फैलती है
मेरी मोहब्बत में हर रात तुझसे मिलने का ख्वाब सजता है
चाँद और तेरी मोहब्बत का संग
मेरी रातों की तन्हाई में रोशनी भर देता है
चाँद की रोशनी में तेरी यादें सजती हैं
मेरी तन्हाई में बस तू ही बसा है
रात की चुप्पी में तेरी मुस्कान गूंजती है
मेरी रातें तेरी मोहब्बत से रोशन होती हैं
तेरी यादों की गर्मी में चाँद भी शरमाता है
हर पल मेरी तन्हाई तुझसे ही भर जाती है
चाँद के साए में तेरी हँसी मेरे ख्वाबों में आती है
मेरी मोहब्बत हर रात तेरे नाम गाती है
Chand Par Shayari
चाँद पर शायरी की दुनिया में एक अद्वितीय जादू है। जब चाँद की हल्की रोशनी रात के अंधेरों को चीरती है, तो मन में अनगिनत भावनाएँ उमड़ने लगती हैं। यह चाँद, जो सदियों से प्रेम, विरह और सपना देखन के प्रतीक के रूप में चमक रहा है, हमें अपने अनुभवों को शब्दों में पिरोने की प्रेरणा देता है।

कई चाँद थे सर-ए-आसमाँ कि चमक चमक के पलट गए
न लहू मिरे ही जिगर में था न तुम्हारी ज़ुल्फ़ सियाह थी
कल रात इक तारा देखा टूटता हुआ बिल्कुल मेरे जैसा
चांद को जरा भी फर्क न पड़ा क्योंकि वो भी है तेरे जैसा !!
चाहते तो हम भी तुम्हें एक जमाने से थे,
मगर यह चांद कब मोहब्बत करने वालों का हुआ है.
दिल की बातें छुपा रखीं चाँदनी ने,
सपनों को भी रोशन कर दिया चाँद ने।
बेचैन इस कदर था कि सोया नही रात भर
पलकों से लिख रहा था तेरा नाम चांद पर !
अब चांद में भी नजर आने लगा है चेहरा उनका
जबसे इजहार-ए -मोहब्बत हुआ है उनका !!
तेरे चेहरे का नूर कुछ ऐसा छाया है,
चाँद भी अब तो मुरझाया सा लगता है।
वो पलकें झुकाकर अक्सर यूं शर्माते हैं
जब हम उन्हें प्यार से चांद कहकर बुलाते हैं !!
चाँद के दीदार में तुम छत पर क्या चली आई,
शहर में ईद की तारीख मुक्कमल हो गयी…
हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं
तुम हंस दो तो रात भी चाँदनी बन जाए,
तुम्हें देख कर तो चाँद भी शर्मा जाए।
तुम जिद चाँद की करो
मै तुम्हे आईना दिखा दूंगा।
चांद से तो हर किसी को प्यार है,
मैं खुशनसीब हूं कि चांद को मुझसे प्यार है..!!
लोग पूछते हैं कि हम चांद को यूं बार बार देखते क्यों हैं,
अब उन्हें कौन समझाए की चांद में हमें महबूब नजर आता है..!!
न चांद की चाहन फलक का इंतजार है,
कैसे कहूंमुझे बस तुझसे ही प्यार है..!!
आज टूटेगा गुरूर चाँद का तुम देखना यारो,
आज मैंने उन्हें छत पर बुला रखा है..!!
अब चांद में भी नजर आने लगा है चेहरा उनका,
जबसे इजहार-ए-मोहब्बत हुआ है उनका।
वो पलकें झुकाकर अक्सर यूं शर्माते हैं,
जब हम उन्हें प्यार से चांद कहकर बुलाते हैं।
फूल गुल शम्स ओ क़मर सारे ही थे
पर हमें उन में तुम्हीं भाए बहुत
चांद की रोशनी भी लगती है अधूरी आज रात
शायद कोई ग़म है उसके दिल में भी मेरे साथ !!
यकीन चांद से हो सूरज पर ऐतबार भी रख,
मगर निगाहों में थोड़ा सा इंतजार भी रख.
क्यूँ मेरी तरह रातों को रहता है परेशाँ,
ऐ चाँद बता किस से तेरी आँख लड़ी है।
चाँद की नूरानी छाँव में जब रात सिमट जाती है,
दिल के हर ग़म को वो शांति में बदल जाती है..!
उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा
आसमां पे चांद पूरा था मगर आधा लगा !
मैं हर रात सारी ख़्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता हूँ,
मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती हैं।
चाँद अपने आप को कहते हो तुम
आओ देखें हो गई है रात भी….
फ़लक पे चाँद सितारे निकलने हैं हर शब
सितम यही है निकलता नहीं हमारा चाँद
चाँद जैसी नूरी हो तुम,
दिल की धड़कन पूरी हो तुम।
काश हमारी क़िस्मत में ऐसी भी कोई शाम आ जाए
एक चाँद फ़लक पर निकला हो एक छत पर आ जाए।
चाँद की तरह तुम भी नाज़ुक और हसीन हो,
मेरी हर धड़कन की सबसे ख़ूबसूरत तमीज़ हो।
रात का चाँद भी फीका लगे,
जब तुम्हारा चेहरा सामने आए।
चाँद को देखने से बेहतर है तुम्हें देखना,
क्योंकि तुममें ही तो मेरी दुनिया बसती है।
तुम्हारी ख़ूबसूरती को चाँद भी सलाम करे,
इतनी प्यारी हो तुम कि ज़माना भी क़ायम करे।
काश मैं उनका अंबर वह मेरी चाँद बन जाए,
कुछ इस तरह हम दोनों एक दूसरे के हो जाएं।
बुझ गये ग़म की हवा से प्यार के जलते चिराग,
बेवफ़ाई चाँद ने भी तो पड़ गया इसमें दाग।
जिस चाँद के हजारों हो चाहने वाले,
वो क्या समझेगा एक सितारे की कमी को !
चाँद के दीदार में तुम छत पर क्या चली आई,
शहर में ईद की तारीख मुकम्मल हो गई….
पेड़ के नीचे ज़रा सी छाँव जो उस को मिली
सो गया मज़दूर तन पर बोरिया ओढ़े हुए
छुप गया ईद का चाँद निकल कर देर हुई पर जाने क्यों
नज़रें अब तक टिकी हुई हैं मस्जिद के मीनारों पर
आँख जब सूरज की पथराने लगी
चाँद से चेहरे शहाबी हो गए
चाँद ने आज जब इक नाम लिया आख़िर-ए-शब
दिल ने ख़्वाबों से बहुत काम लिया आख़िर-ए-शब
चेहरे शादाबी से आरी आँखें नूर से ख़ाली हैं
किस के आगे हाथ बढ़ाऊँ सारे हाथ सवाली हैं
चाँद से तुझ को जो दे निस्बत सो बे-इंसाफ़ है
चाँद के मुँह पर हैं छाईं तेरा मुखड़ा साफ़ है
ऐ काश हमारी क़िस्मत में ऐसी भी कोई शाम आ जाए
इक चाँद फ़लक पर निकला हो इक चाँद सर-ए-बाम आ जाए
पाँव साकित हो गए ‘सरवत’ किसी को देख कर
इक कशिश महताब जैसी चेहरा-ए-दिलबर में थी
रात को रोज़ डूब जाता है
चाँद को तैरना सिखाना है
ये किस ज़ोहरा-जबीं की अंजुमन में आमद आमद है
बिछाया है क़मर ने चाँदनी का फ़र्श महफ़िल में
वो चार चाँद फ़लक को लगा चला हूँ ‘क़मर’
कि मेरे बा’द सितारे कहेंगे अफ़्साने
चाँद में तू नज़र आया था मुझे
मैं ने महताब नहीं देखा था
रुस्वा करेगी देख के दुनिया मुझे ‘क़मर’
इस चाँदनी में उन को बुलाने को जाए कौन
सब सितारे दिलासा देते हैं
चाँद रातों को चीख़ता है बहुत
तुम जिसे चाँद कहते हो वो अस्ल में
आसमाँ के बदन पर कोई घाव है
Conclusion
का आकर्षण Chand Shayari in Hindi का आकर्षण इस बात में निहित है कि यह उन भावनाओं को व्यक्त करने में सक्षम होती है जिन्हें शब्द अक्सर पूरी तरह से बयान नहीं कर पाते। इसकी पंक्तियाँ चाँदनी रात से प्रेरित प्रेम, यादों की मिठास और शांति की भावना को समेटे होती हैं।
जब आप इस खूबसूरत शायरी के संग्रह में गहराई से उतरते हैं, तो आपको प्रेम और विरह की अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की प्रेरणा मिल सकती है। आप इन मनमोहक शायरियों को अपने प्रियजनों के साथ साझा करने में संकोच न करें और चाँदनी को अपने रिश्तों में अपना जादू बिखेरने दें।
FAQs
What is the Meaning of Chand in Poetry?
In poetry, “Chand” typically refers to a moon or moonlight, symbolizing beauty, serenity, and often introspection. The moon has long been a popular motif in literature, representing not just physical beauty but also emotional depth and longing.
How do You Spell Chand?
The spelling “Chand” is indeed correct for various contexts, particularly in certain languages and cultures. For example, in Hindi and other Indian languages, “Chand” (चाँद) means “moon.” It can also be a common surname or part of names in South Asia.
What Does “Chand” Mean?
“Chand” is a word of Persian origin that translates to “moon” in several South Asian languages, including Hindi and Urdu. It often carries connotations of beauty and romance, reflecting the moon’s soft glow and its significance in poetry and art.
How do You Caption a Moon?
When captioning a moon photo, it’s important to convey not only the visual beauty but also the feeling or story behind the image. Start by describing what makes this particular moon special — whether it’s a full moon, a crescent, or a rare supermoon.







