50+ Matlabi Rishte Dhoka Shayari In Hindi Heart Touching – 2026
रिश्ते हमारी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा होते हैं, लेकिन कितनी बार हमें धोखे का सामना करना पड़ता है“Matlabi Rishte Dhoka Shayariइसी विषय पर रोशनी डालती है, जो हमें दिखाती है कि कोई कितनी आसानी से दिल में जगह बना कर फिर उसे चोट पहुँचा सकता है। इस लेख में हम ऐसी शायरी पेश करेंगे जो
जो आपकी भावनाओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेंगी। यह शायरी न केवल आपको अपने अंदर झांकने का मौका देगी बल्कि रिश्तों की कड़वी सच्चाई को भी स्पष्ट करेगी।
Matlabi Rishte Dhoka Shayari
रिश्तों के जटिल ताने-बाने में धोखा अक्सर कवियों और प्रेमियों के दिलों में जगह बना लेता है। “धोखा शायरी” इस भावनात्मक उथल-पुथल को बेहद खूबसूरती के साथ व्यक्त करती है, और दर्द को कला के एक शक्तिशाली रूप में बदल देती है।

मतलबी रिश्तों का यही दस्तूर होता है
ज़रूरत ख़त्म तो अपनापन भी दूर होता है !!
जो अपने मतलब से रिश्ता निभाते हैं
वक्त आने पर सबसे पहले भाग जाते हैं !!
रिश्ते निभाने का हुनर अब किसके पास है
सबको बस अपने फायदे की तलाश है !!
भगवान जब तूने रिश्ते बनाना सीखा दिया
तो मतलब के लिए इन्हे तोडना भी सीखा दिया !!
रिश्तों को खुदगर्जियो से तोला हे कुछ लोगो ने
अब कोई हाल भी पूछे तो मतलब नज़र आता है !!
स्वार्थी लोग रिश्ते बस दिखावे के लिए बनाते हैं
जब तक फायदा हो, तब तक साथ निभते हैं !!
रिश्तों पर रुपयों की किश्ते जोड़ देते है
खाली हो जेब तो अपने हर रिश्तें तोड़ देते है !!
रिश्तों की दुनिया अब स्वार्थ से चलती है
सच्चाई की क़ीमत हर जगह कम मिलती है !!
धोखा देकर भी लोग शर्मिंदा नहीं
मतलबी रिश्तों में कोई जिंदा नहीं !!
यहाँ सबकी चाहत बस फ़ायदे तक रहती है
मतलब निकलते ही मोहब्बत खत्म हो जाती है !!
जिसे चाहा दिल से, वही बेवफा हो गया
मतलबी था वो, मतलब निकलते ही जुदा हो गया !!
जिसे अपना समझा, वही पराया हो गया
कल तक था जो मेरा, आज किसी और का हो गया !!
जिसे अपना समझा, वही पराया हो गया
कल तक था जो मेरा, आज किसी और का हो गया !!
कभी मतलब के लिए तो कभी बस मनोरंजन के लिए
हर कोई प्यार ढूंढ रहा है यहाँ ज़िन्दगी के लिये !!
वो प्यार भी करता था, धोखा भी देता था
रिश्ता निभाने का बस नाटक करता था !!
जिनकी दुआ किया करते थे रोज हजारों में
वहीं बेचते थे रिश्ते हर रोज बाजारों में !!
जिसे चाहा दिल से, वही बेवफा हो गया
मतलबी था वो, मतलब निकलते ही जुदा हो गया !!
रिश्तों में चालाकी पर शायरी
धूर्तता रिश्तों की बुनियाद में दोधारी तलवार की तरह अपना रास्ता बना सकती है। कविता की दुनिया में, यह अक्सर एक पात्र बन जाती है, अंतरंगता की छाया में छिपा एक मौन साथी। कवि न केवल चतुराई के आकर्षण का, बल्कि छल-कपट के कपट का भी अन्वेषण करते हैं, यह दर्शाते हुए कि कैसे मोहकपन गहरे इरादों को छुपा सकता है।

मुद्दत हुई इक शख़्स ने दिल तोड़ दिया था
इस वास्ते अपनों से मोहब्बत नहीं करते
ज़ख़्म लगा कर उस का भी कुछ हाथ खुला
मैं भी धोका खा कर कुछ चालाक हुआ
जो उन मासूम आँखों ने दिए थे
वो धोके आज तक मैं खा रहा हूँ
किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी
ये हुस्न ओ इश्क़ तो धोका है सब मगर फिर भी
फ़ासला नज़रों का धोका भी तो हो सकता है
वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो
अक़्ल कहती है दोबारा आज़माना जहल है
दिल ये कहता है फ़रेब-ए-दोस्त खाते जाइए
वफ़ाओं के बदले जफ़ा कर रहे हैं
मैं क्या कर रहा हूँ वो क्या कर रहे हैं
धोका था निगाहों का मगर ख़ूब था धोका
मुझ को तिरी नज़रों में मोहब्बत नज़र आई
मेरे ब’अद वफ़ा का धोका और किसी से मत करना
गाली देगी दुनिया तुझ को सर मेरा झुक जाएगा
ऐ मुझ को फ़रेब देने वाले
मैं तुझ पे यक़ीन कर चुका हूँ
किस ने वफ़ा के नाम पे धोका दिया मुझे
किस से कहूँ कि मेरा गुनहगार कौन है
हाथ छुड़ा कर जाने वाले
मैं तुझ को अपना समझा था
कितने ही साँप यहाँ आ के पड़े रहते हैं
इस लिए आस्तीं दिल से भी बड़ी रक्खी है
मिरे ख़िलाफ़ मिरे दोस्तों की साज़िश है
मैं जानता हूँ मगर देख कर भी अंधा हूँ
छल कपट से एक रावन की तरह
हर किसी के दिल को तड़पाती तो है
धोके खा के सीखा है
धोका कैसे देना है
Dhoka in Relationship
रिश्तों में धोखा अक्सर दर्द और अविश्वास की एक गहरी छाप छोड़ जाता है, जिसे वही लोग सबसे बेहतर समझ पाते हैं जिन्होंने इसे सहा है। “भरोसा काँच की तरह होता है; एक बार टूट जाए तो उसे कभी भी पूरी तरह पहले जैसा नहीं बनाया जा सकता।”

स्वार्थी लोग रिश्ते बस दिखावे के लिए बनाते हैं
जब तक फायदा हो, तब तक साथ निभते हैं !!
स्वार्थी लोग जब किसी से प्यार दिखाते हैं
बस अपना फायदा देखकर वो साथ निभाते हैं !!
मतलब की खातिर रिश्ता निभाया जाता है
काम निकलते ही इंसान भुला दिया जाता है !!
लोगों में कही अच्छाई है तो कही बुराई है
स्वार्थ के चक्कर में रिश्तों में दरार आई है !!
मतलबी रिश्तों की ये दुनिया अजीब है
जहाँ दिल भी टूटे, वहीं इल्ज़ाम भी नसीब है !!
ये जो हालत है मेरे, एक ना एक दिन सुधर ही जायेंगे
लेकिन तब तक काफी लोग, इस दिल से उतर जायेंगे !!
धोखेबाज़ लोगों का यही तो दस्तूर है
जब ज़रूरत खत्म, तब रिश्ता भी दूर है !!
वक़्त बदलते ही लोग बदल जाते हैं
मतलबी रिश्ते रंग दिखा जाते हैं !!
रिश्ते अगर दिल से हो तो दर्द नहीं देते
लेकिन अगर मतलब से हों तो जख्म गहरे देते हैं !!
दोस्ती का मतलब अब फ़ायदा है
बाकी सब तो बस दिखावा है !!
दिखावे के रिश्तों से चोट गहरी लगती है
क्योंकि वहाँ मोहब्बत नहीं, मतलब पलता है !!
अपने मतलब की बारी आई तो सब रिश्ते अच्छे लगने लगे
जब अपनों की बारी आई तो सब बुरे लगने लगें !!
झूठे रिश्तों का साया बड़ा खतरनाक होता है
दिखते हैं अपने, मगर अंदर से बेगाने होते हैं !!
Dhoka Love
प्यार में धोखा अक्सर इस बात की कड़ी याद दिलाता है कि इंसान रिश्तों को आदर्श रूप में देखने की प्रवृत्ति रखता है, जबकि वह उनकी छिपी हुई सच्चाइयों को नजरअंदाज कर देता है। हालांकि, धोखे को केवल दर्द का कारण मानने के बजाय इसे एक महत्वपूर्ण शिक्षक के रूप में भी देखा जा सकता है।

यहां लोग रिश्तों को बेच देते हैं
मतलब पर मोहब्बत छोड़ देते हैं !!
दिल से निभाने वाले मिलते नहीं
मतलब के बिना रिश्ते चलते नहीं !!
रिश्ता निभाने का सिर्फ़ नाटक करते हैं
धोखेबाज़ लोग मोहब्बत भी हिसाब से करते हैं !!
मतलबी रिश्तों का अजीब किस्सा है
जिसने दिल तोड़ा, वही सबसे ज्यादा अपना दिखता है !!
मतलबी रिश्तों में अब मोहब्बत कहां मिलती है
बस जरूरत पूरी होने तक ही बात होती है !!
ज़रूरतें जब पूरी हों तो अपनापन मिलता है
वरना रिश्तों का हर नकाब गिरता है !!
मतलब के रिश्ते कांटों जैसे होते हैं
पकड़ो तो चुभते हैं, छोड़ो तो बिखर जाते हैं !!
बात सह गए तो रिश्ते रह गए
बात कह गए तो रिश्ते ढह गए !!
धोखे से भरी ये दुनिया लगती है
मतलबी रिश्तों में वफ़ा कहाँ मिलती है !!
इंसान का स्वार्थ जब पूरा हो जाता है
स्वार्थ में अपनों से ही दूर हो जाता है !!
खुद की बात आती है तो कुछ भी करते है लोग
जैसे स्वार्थ को तो हर वक्त साथ लेकर चलते है लोग !!
रिश्तों के बाज़ार में हर चीज़ बिकती है
वफ़ा मांगो तो सबसे बड़ी कीमत लिखती है !!
दिखावे की दुनिया में रहना पड़ता है
मतलब के लिए धोखा सहना पड़ता है !!
Matlabi Rishte
स्वार्थी रिश्ते, जहाँ स्नेह अक्सर छिपे हुए स्वार्थों का मुखौटा होता है, दिल पर गहरी छाप छोड़ जाते हैं। भरोसे की सच्चाई तब टूट जाती है जब इरादे सामने आ जाते हैं, और धोखे का एक ऐसा जाल बुन दिया जाता है जो दर्द भरी शायरी के रूप में दिलों में गूंजता रहता है।
दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं,
दोस्तों की मेहरबानी चाहिए।
तू भी सादा है, कभी चाल बदलता ही नहीं,
हम भी सादे हैं, इसी चाल में आ जाते हैं।
मुद्दत हुई एक शख्स ने दिल तोड़ दिया था,
इस वास्ते अपनों से मोहब्बत नहीं करते।
कम से कम मौत से ऐसी मुझे उम्मीद नहीं,
ज़िंदगी तूने तो धोखे पे दिया है धोखा।
ज़ख़्म लगा कर उसका भी कुछ हाथ खुला,
मैं भी धोखा खाकर कुछ चालाक हुआ।
जो उन मासूम आँखों ने दिए थे,
वो धोखे आज तक मैं खा रहा हूँ।
आदमी जान कर खाता है मोहब्बत में फ़रेब,
ख़ुद-फ़रेबी ही मोहब्बत का सिला हो जैसे।
धोखा था निगाहों का मगर खूब था धोखा,
मुझ को तेरी नज़रों में मोहब्बत नज़र आई।
अहबाब को दे रहा हूँ धोखा,
चेहरे पर खुशी सजा रहा हूँ।
यार मैं इतना भूखा हूँ,
धोखा भी खा लेता हूँ।
एक बरस भी अभी नहीं गुज़रा,
कितनी जल्दी बदल गए चेहरे।
हर-चंद एतिबार में धोखे भी हैं मगर,
ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए।
ऐ मुझे फ़रेब देने वाले,
मैं तुझ पर यक़ीन कर चुका हूँ।
किस ने वफ़ा के नाम पे धोखा दिया मुझे,
किस से कहूँ कि मेरा गुनहगार कौन है।
ऐसे मिला है हम से शिनासा कभी न था,
वो भी शायद इसी धोखे में मिला था मुझ को।
जो बात दिल में थी, उससे नहीं कही हमने,
वफ़ा के नाम से वो भी फ़रेब खा जाता।
ढूँढती है इज़्तिराब-ए-शौक़ की दुनिया मुझे,
आप ने महफ़िल से उठवा कर कहाँ रखा मुझे। .
वो यूँ बदल ही जाएगा सोचा कभी न था।
उसको भी मेरी तरह अपनी वफ़ा पर था यक़ीन,
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Dhoka Chalaki Quotes
ये धोखा और चालाकी पर कहे गए उद्धरण मानव संबंधों की जटिलताओं का एक आईना हैं, जो धोखे की कला और उसके पीछे छिपी समझ को दर्शाते हैं। ये विचार हमें याद दिलाते हैं कि भरोसा हमारे जीवन में एक साथ बहुत नाज़ुक और बहुत शक्तिशाली तत्व होता है।

रिश्तों की किताब में सिर्फ धोखा ही पढ़ा है
मतलबी लोगों ने तो सच्चाई से हमेशा किनारा किया है !!
सच्चे दिल से निभाओ तो धोखा मिलता है
मतलब से निभाओ तो फायदा मिलता है !!
मतलबी रिश्ते रास्ते जैसे होते हैं
चलते-चलते बदल जाते हैं !!
रिश्तों का नकाब चढ़ाकर घूमते हैं लोग
पीठ पीछे वार कर जाते हैं लोग !!
रिश्ते, जो सिर्फ़ फायदे पर टिकते हैं
वही रिश्ते वक्त के साथ तोड़ दिए जाते हैं !!
मतलबी दुनिया का अजीब फ़साना है
जब तक जरूरत है, तब तक अफसाना है !!
चेहरे पर मासूमियत और दिल में खंजर छुपाए बैठे हैं
यही मतलबी लोग रिश्तों का नाम बदनाम किए बैठे हैं !!
यूँ असर डाला है स्वार्थी लोगो ने दुनिया पर
हाल चाल भी पूछो तो लोग समझते है की काम होगा !!
ये संग दिलो की दुनिया है
यहाँ संभल के चलना दोस्त
यहाँ पलकों पर बिठाया जाता है
नजरो से गिराने के लिए !!
धोखे की ये दुनिया बड़ा ग़जब का मेला है
हर चेहरे के पीछे एक नया झूठ फैला है !!
चेहरे की मुस्कान में छुपा है ज़हर
मतलबी रिश्ते करते हैं बर्बाद शहर !!
मतलबी लोग बस जरूरत तक साथ रहते हैं
दिल से निभाने वाले बहुत कम मिलते हैं !!
यहाँ भरोसे का सौदा सस्ता हो गया है
मतलबी रिश्तों में सबकुछ धुंधला हो गया है !!
मेरी जेब में ज़रा सा छेद क्या हो गया
सिक्के से ज़्यादा तो रिश्ते गिर गए !!
जब कोई इंसान नज़र अंदाज़ करना शुरू करदे
तोह समझ लेना उसकी ज़रूरतें पूरी होगी है !!
मतलबी रिश्तों में दर्द ही मिलता है
दिल का सुकून कहीं खो जाता है !!
सड़कों की तरह काश ज़िन्दगी के रास्तों पर भी
लिखा होता की आगे खतरनाक मोड़ है, सावधान रहें !!
मतलब के लिए लोग पास आते हैं
फायदा निकलते ही दूरियाँ बढ़ाते हैं !!
दुनिया की इस भीड़ में एक तनहा सी रूह हूँ
चेहरे तो कई है जनाब, तभी तो हँसता बहुत खूब हूँ !!
सच्चा रिश्ता ढूंढना मुश्किल हो गया
मतलबी इंसानों का जमाना हो गया !
Dhokebaj Status
ये धोखेबाज़ स्टेटस केवल बेईमानी पर एक हल्का-फुल्का तंज नहीं हैं; बल्कि यह रिश्तों में भरोसे पर एक व्यापक चर्चा को भी समेटते हैं। ये दूसरों को दिल टूटने, रिश्तों की जटिलताओं और प्यार की अक्सर असहज सच्चाइयों पर एक सामूहिक बातचीत में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं।
मतलबी रिश्तों का यही दस्तूर होता है
ज़रूरत ख़त्म तो अपनापन भी दूर होता है !!
जो अपने मतलब से रिश्ता निभाते हैं
वक्त आने पर सबसे पहले भाग जाते हैं !!
रिश्ते निभाने का हुनर अब किसके पास है
सबको बस अपने फायदे की तलाश है !!
भगवान जब तूने रिश्ते बनाना सीखा दिया
तो मतलब के लिए इन्हे तोडना भी सीखा दिया !!
रिश्तों को खुदगर्जियो से तोला हे कुछ लोगो ने
अब कोई हाल भी पूछे तो मतलब नज़र आता है !!
स्वार्थी लोग रिश्ते बस दिखावे के लिए बनाते हैं
जब तक फायदा हो, तब तक साथ निभते हैं !!
रिश्तों पर रुपयों की किश्ते जोड़ देते है
खाली हो जेब तो अपने हर रिश्तें तोड़ देते है !!
रिश्तों की दुनिया अब स्वार्थ से चलती है
सच्चाई की क़ीमत हर जगह कम मिलती है !!
धोखा देकर भी लोग शर्मिंदा नहीं
मतलबी रिश्तों में कोई जिंदा नहीं !!
यहाँ सबकी चाहत बस फ़ायदे तक रहती है
मतलब निकलते ही मोहब्बत खत्म हो जाती है !!
जिसे चाहा दिल से, वही बेवफा हो गया
मतलबी था वो, मतलब निकलते ही जुदा हो गया !!
जिसे अपना समझा, वही पराया हो गया
कल तक था जो मेरा, आज किसी और का हो गया !!
जिसे अपना समझा, वही पराया हो गया
कल तक था जो मेरा, आज किसी और का हो गया !!
कभी मतलब के लिए तो कभी बस मनोरंजन के लिए
हर कोई प्यार ढूंढ रहा है यहाँ ज़िन्दगी के लिये !!
वो प्यार भी करता था, धोखा भी देता था
रिश्ता निभाने का बस नाटक करता था !!
जिनकी दुआ किया करते थे रोज हजारों में
वहीं बेचते थे रिश्ते हर रोज बाजारों में !!
जिसे चाहा दिल से, वही बेवफा हो गया
मतलबी था वो, मतलब निकलते ही जुदा हो गया !!
Conclusion
Matlabi Rishte Dhoka Shayariस्वार्थ और विश्वासघात से बने रिश्तों की जटिलताओं की यह एक मार्मिक याद दिलाती है। ये दिल को छू लेने वाली पंक्तियाँ झूठे और मतलबी रिश्तों से मिलने वाले दर्द, टूटे हुए विश्वास और निराशा को बखूबी व्यक्त करती हैं, जो ऐसे अनुभवों से गुज़रे लोगों के दिल को गहराई से छू जाती हैं।
ऐसी काव्यात्मक अभिव्यक्तियों को अपनाकर हम अपने दर्द को समझने, उससे उबरने और आत्मचिंतन का एक सुंदर मार्ग बना सकते हैं। आइए, अपनी भावनाओं और अनुभवों को साझा करने से न झिझकें, क्योंकि कविता दिलों को जोड़ने और एक-दूसरे को बेहतर समझने का एक शक्तिशाली माध्यम है।
FAQs
What is the Meaning of Matlabi?
“Matlabi” is a term derived from Hindi meaning someone who is self-serving or opportunistic. It is often used to describe individuals who exploit relationships or situations for their personal gain, rather than showing genuine concern or loyalty.
What is the Matlabi Duniya about?
“Matlabi Duniya,” which translates to “Selfish World,” delves into the complexities of human relationships and societal dynamics. The premise centers around the idea that many individuals act out of self-interest, seeking personal gain rather than fostering genuine connections.
What is the purpose of Dhoka poetry?
Dhoka poetry serves as a profound exploration of the complexities of human emotions and relationships. Originating from the Nepali tradition, Dhoka often reflects themes of love, betrayal, longing, and resilience.
What is Another Word for Dhoka?
“Dhoka” is a word from Hindi and Urdu that translates to “deception” or “betrayal.” In English, synonyms for “dhoka” include terms like “trickery,” “betrayal,” or “fraud.” Each of these words captures the essence of deceitful behavior, whether it’s in a personal relationship or a broader context.







